My Poetry

सोच

रूठे बैठे हैं वोह, उनको मनाऊ कैसे,
दर्द दिल का मै, उनको दिखाऊ कैसे/

उठ रहा है धुआं हर घर मै आज,
आग चूल्हे या घर मै लगी, मै बताउं कैसे/

लेकर मेहनत की कमाई लौटा वोह घर को,
सोचने बैठ गया इस को मै बचाऊ कैसे/

घर वोह लाया था जिसे अपनी दुल्हन बना कर,
सोचता है की उसमे, मै आग लगाऊं कैसे/

याद

कुछ पल जो गुजारे तेरे साथ ,
वोह मुझे याद हैं
तेरी महकती हुई खुशबु ,
वोह मुझे याद हैं
तेरी ज़ुल्फ़ों का बिखरना ,
वोह मुझे याद हैं
वोह तेरा खुद मे सिमटना,
वोह मुझे याद हैं
दूर जा कर भी पास जाना ,
वोह मुझे याद हें
कुछ भी ना कह कर सब कुछ कह जाना ,
वोह मुझे याद हैं
पर अब तुम नहीं पासबस तुम्हारी याद है,
हाँ बस यही याद हैबस वही याद है/

  1. August 17, 2009 at 6:20 pm

    yaar tu tou achi kavita likh leta hai.

    Good ones!!!

    Az: Thanks

  2. PB
    August 18, 2009 at 9:56 am

    Making of another Devdaas….

  3. dhiraj
    August 18, 2009 at 10:13 am

    kya baat hai??
    ap to miyan bade shayar hote ja rahe hain
    kuch achha sa takhallus bhi rakh lo ….

    Az: “Zafar” naam ka takhallus rakh liya hai

  4. August 25, 2009 at 10:56 am

    iss page ko password protect kar lo, you never know one day you will see one of these under some other name ;).

  5. Preeti
    February 12, 2010 at 6:20 pm

    miyan Zafar…kuch aur bhi padhiye…

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